शीर्षक - प्रस्ताव लेखनी प्रतियोगिता -08-Feb-2022
शीर्षक - प्रस्ताव
प्रस्ताव,
इजहार
और
इकरार
करने के दिनों को...
यूं ही..
जाने ना दें,
चुप न बैठें,
देर ना करें ...
बोल दें
अपना हाले दिल,
अपनी जुबा से ...
"उसे"
दूर ना होने दे...
अपना
प्यार ना खोने दें..
यह मोहब्बत
सिर्फ
प्यार नहीं मांगती ...
मांगती है ,
दिलबर से
इजहार भी,
बंद जुबान के
तो
कई किस्से
शुरू होने से पहले ही ,
बिखरते ,
टुटते..
चुर-चुर हो जाते ,
समझने
समझाने
कह डालने से...
हम अपना प्यार
पा जाते हैं...
तो
फिर
लेट क्यूँ हो जाते हैं,
समय रहते,
प्रस्ताव क्यों नहीं दे देते...
ज्योति सिन्हा मुजफ्फरपुर, बिहार
Punam verma
10-Feb-2022 09:01 AM
Nice
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Seema Priyadarshini sahay
08-Feb-2022 08:04 PM
बहुत बेहतरीन
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राजीव भारती
08-Feb-2022 05:00 PM
जी बेहतरीन रचना।
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